इस मंदिर में माँ काली करती है ढाई गिलास मदिरा का पान

मंदिर में मुख्य दो प्रतिमा लगी हुई है | एक माँ ब्रह्माणी की जबकि दूसरी माँ काली की | यह दोनों प्रतिमाये स्वयम प्रकट हुई है | माँ ब्रह्माणी को भक्त लगाते है मिठाई और फलो का भोग जबकि काली माँ को पिलाई जाती है ढाई गिलास मदिरा | यह मदिरा मुराद पूरी होने पर या यूँ ही पिलाई जाती है | यदि आपने मन से या कोई गलती की हो तो माँ काली आपके द्वारा चढ़ाई मदिरा का पान नही करती है |

जैसे ही मदिरा से भरा चांदी का गिलास माँ काली के होठो पर लगाया जाता है , गिलास खाली हो जाता है | ऐसे तीन बार गिलास माँ को पिलाये जाते है पर तीसरे गिलास से माँ आधा ही पान करती है | बचा हुआ आधा गिलास भक्त प्रसाद के रूप में ले लेते है |

डाकुओ ने बनाया मंदिर लुट के माल से :
ऐसा बताया जाता है की इस जगह एक बार डाकू डाका डाल कर रात को ठहरे थे | माँ के प्रताप से उन्हें कुछ ऐसा महसूस हुआ की उन्होंने इस मंदिर का निर्माण उस लुटी हुई रकम से कर दिया |

मंदिर का निर्माण :
मंदिर में लगे शिलालेख के हिसाब से यह मंदिर विक्रम संवत 1170 का बना हुआ है | मंदिर के पुजारी इसे 12वी शताब्दी का बताते है | मंदिर लाल पत्थरो से बना हुआ है और दीवारों पर देवी देवताओ की कलाकर्तिया बनी हुई है |

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