इतिहास की ऐसी कौनसी इमारते हैं जो बिना नींव के टिकी हुई है ?

ब्रिटिशकाल में ‘राजपूताना’ नाम से जाना जाने वाला राजस्थान, भारत के सबसे प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। शानदार महल, राजसी किले, हाथियों व ऊँटों की शाही सवारी और दूर-दूर तक रेगिस्तान का विस्तार, ये सारी चीजें पुरे भारत में सिर्फ एक ही जगह है, राजस्थान ! जहाँ इन सब अद्भुत आकर्षणों के साथ आप शाही राजसी जीवन का लुत्फ़ उठा सकते हैं।

यहाँ बने लगभग सारे किले व महल कई सदियों पहले स्थापित किये गए थे। पर आज भी ये राजसी शान से अपनी ऊंचाई के साथ, अपने आकर्षण के साथ शान से खड़े ,पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

  • हवामहल

राजस्थान के जयपुर शहर के सिटी प्लेस में मौजूद यह इमारत किसी अजूबे से कम नही है। यह खूबसूरत इमारत राजाओ की शानो शौकत को बयां करती है। हवा महल लाल गुलाबी बलुआ पत्थर से निर्मित है। हवामहल का निर्माण आमेर के महाराजा “सवाई प्रताप सिंह” ने करवाया था। हवामहल के निर्माण का मकसद महिलाओं के लिए था। महिलाएं महल के झरोखों से उत्सवों का आनन्द ले पाती थी। गर्मियों में राजपूत महिलाएं इसी महल में आती थी। यह महल विशेषत राजसी स्त्रीयों के लिए बनाया गया था। यहां कठपुतली और शतरंज के खेल हुआ करते थे।

हवामहल एक पांच मंजिला इमारत है जो पिरामिड की शेप में बनी हुई है। इस महल की ऊंचाई 15 मीटर है। इस महल की ऊपरी मंजिल की चौड़ाई केवल 1.5 फ़ीट है । हवामहल में कुल 953 खिड़कियां है जो हवा के झरोखे की तरह है। इसी कारण से इसे हवामहल कहा जाता है।

इस हवामहल की कोई नींव नही है। यह बिना नींव का दुनिया मे सबसे बड़ा महल है। हवामहल बेहतरीन कारीगरी का नमूना है। हवामहल की दीवारों पर फूल पत्तियों की नक्काशी बनी हुई है। खम्बों और झरोखों पर मुग़ल और राजपूत शैली की झलक मिल जाती है।

  • गागरोन का किला

राजस्थान के झालावाड़ जिले में यह किला चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। यही नहीं यह भारत का एकमात्र ऐसा किला है जिसकी नींव नहीं है । गागरोन का किला अपने गौरवमयी इतिहास के कारण भी जाना जाता है। सैकड़ों साल पहले जब यहां के शासक अचलदास खींची मालवा के शासक होशंग शाह से हार गए थे तो यहां की राजपूत महिलाओं ने खुद को दुश्मनों से बचाने के लिए जौहर (जिंदा जला दिया) कर दिया था। सैकड़ों की तादाद में महिलाओं ने मौत को गले लगा लिया था।

उत्तरी भारत का एकमात्र ऐसा किला है जो चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है इस कारण इसे जलदुर्ग के नाम से भी पुकारा जाता है। यह एकमात्र ऐसा किला है जिसके तीन परकोटे हैं। सामान्यतया सभी किलो के दो ही परकोटे हैं। इसके अलावा यह भारत का एकमात्र ऐसा किला है जिसे बगैर नींव के तैयार किया गया है।

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