आल्हा-उदल कौन थे और वो क्यों प्रसिद्ध हैं, क्या आज भी इनका कोई अस्तित्व है?

आल्हा उदल जससराज बनाफर कै बेटे थे. जस्सराज बनाफर चंदेल राजा परमल परमर्दिदेव कै सेनापति जागीरदार थे. जस्सराज कै एक भाई बच्छराज भी थे जिनके दो बेटे मलखान और सुलखन थे. इनको भी किसी युध मे मृत्यु हो गयी थी. उरई कै माहिल इन आल्हा उदल कै मामा थे और चन्देलों कै विश्वासपात्र थे. आल्हा उधल की माता का नाम देवला था. चंदेल राजा बुंदेलखंड कै राजा थे.

इनकी राजधानी कालिंजर किले मे थी. यह किला बड़ा मज़बूत और प्रदिद्ध है. यह वंश बड़ा हि प्रसिद्ध योद्धाओं का वंश है. इसमें विद्याधर चंदेल, गंड, यशोधर्मा जैसे प्रसिद्ध राजा हुए है. इनमे विद्याधर चंदेल बहुत प्रतापी राजा थे. इन्होने मुहम्मद ग़ज़नवी से दो बार युद्ध किया और उसे हराया. इन्होने खजुराहो मे बहुत से मंदिरों का निर्माण करवाया. कन्नौज नरेश राजयपाल को हटाकर विद्याधर चंदेल ने उसके बेटे त्रिलोचनपाल को राजा बनाया. इसलिए ही मेहमूद ग़ज़नवी ने विद्याधर चंदेल पर आक्रमण किया.कन्नौज बड़ा शक्ति सम्पन्न साम्राज्य था.

परमर्दिदेव की राजधानी महोबा मे भी थी और इनके समय परमर्दिदेव बहुत शक्ति सम्पन्न राजा नहि थे. परन्तु इनको कन्नौज कै राजा जयचंद से सहयोग मिल जाता था. आल्हा उदल अपनी माता कै साथ परमल कै राज्य मे रहते थे. दोनो भाई वहादुर योद्धा थे. इनके पिता का वध एक युद्ध मे जबलपुर मांडो कै राजा कड़िया ने कर दिया था. इन राजाओं को कलूचरी कहा गया है इनके नाम मे कर्ण जोड़ा जाता था. परमाल से पृथ्वीराज चौहान ने भी धमकी दे रखी थी और आक्रमण भी किया था.

राजा की किसी नाराजगी कै कारण आल्हा उदल अपनी माता को महोबा मे ही छोड़कर कन्नौज कै राजा जयचंद की सेवा मे चले गए थे. ज़ब पृथ्वीराज ने परमाल पर आक्रमण किया और राजा परमाल हारने लगा तो आल्हा उदल की माता ने सन्देश भेजकर दोनो योद्धाओं को लड़ने कै लिए बुलाया. अपने देश की रक्षा कै लिए दोनो भाई राजा की बदसलूकी भूलकर पृथ्वीराज चौहान से लड़ने आये और लड़कर शहीद हो गए. उदल की मृत्यु से पहले ही मलखान की मृत्यु पृथ्वीराज से लड़ते हुए हो गयी थी.

मलखान को पृथ्वीराज ने शब्दभेदी वान से मारा था जैसा की पृथ्वीराज ने मुहम्मद गौरी को मरने कै लिए उपयोग किया था. कहते है की आल्हा ने पृथ्वीराज को हरा दिया था और गुरु गोरखनाथ ने पृथ्वीराज को बचा दिया था तथा आल्हा को युद्ध से लेकर चले गए थे. जयचंद कै भाई रतिभान कै बेटे का नाम लखन था और वह भी पृथ्वीराज से लड़ते हुए मारा गया था. चंदबरदाई ने भी पृथ्वीराज रासों मे इनके बारे मे लिखा है. जयचंद को मुहम्मद गौरी ने फ़िरोज़ाबाद कै आसपास ही कहि हराया था 1194 मे और पृथ्वीराज को तराइन मे 1192 मे.

इन सब घटनाओं का पुरा विवरण कवि जगनिक ने परिमल रासो आल्हखंड मे लिखा है. आल्हा उदल की कहानी को झूठ न समझें. हां इसमें थोड़ा अतिशयोक्ति हो सकती है लेकिन इनके होने को प्रामाणिक भी मानना चाहिए. जगनिक परमाल कै बेटी चंदावली कै बेटे थे. पृथ्वीराज की एक बेटी बेला थी जिसकी शादी परिमल कै बेटे ब्रह्मजीत से हुयी थी.

ब्रह्मजीत को भी पृथ्वीराज की फ़ौज ने मार दिया था. आल्हा उधल लखन मलखान ब्रह्मजीत आदि को पांचो पांडवों का अवतार कहा जाता है और पृथ्वीराज को दुर्योधन का अवतार मानते है. पृथ्वीराज का एक सामंत छोंड़ियाराय था जो बड़ा अच्छा स्ट्रेटेजिस्ट और कुशल योद्धा था. ये लोग मुहम्मद गौरी कै प्रातज्वराज पर आक्रमण से पहले ही लड़कर मर चुके थे अन्यथा इनको हराना गौरी कै बस का न था. पृथ्वीराज इन लोगों से लड़कर ही कमजोर हो गए थे और इनके बहुत सारे योद्धा कन्नौज और महोबा की लड़ाई मे मारे जाने से पृथ्वीराज की शक्ति कम हो गयी थी.

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