आखिर क्यों इस जगह होती है किन्नरों की शादी, वजह जानकार उड़ जायेगें होश

आपको बता दें की किन्नरों को इंग्लिश में ट्रांसजेंडर कहा जाता है। इसका मतलब किन्नर ना ही पुरुष और ना ही महिला होते हैं। इसलिए यह विवाह नहीं करते और ऐसे में इनकी शादी की बात थोड़ी अजीब है और इस पर विश्वाश करना मुश्किल है।

आपको बता दूँ की इनकी शादी का कारण पौराणिक कथाएं हैं। सभी धरम का अपना अलग अलग विधि शादी का वैसे ही किन्नरों का एक डीएम अलग तरीका और बिलकुल हैट के विधि विधान। किन्नर इसको त्यौहार की तरह मानते हैं , इस त्यौहार में किन्नर चढ़ बढ़ के हिस्सा लेते हैं। बता दें की इनका यह उतसव तमिलनाडु के एक गावं में मनाया जाता है। आपको बता दें की तमिलनाडु के विल्लुपुरम के कुवागम गावं में यह रीतिरिवाज़ किया जाता है, इस रीती में किन्नरों के भगवान् अरवन की पूजा की जाती है।

इस त्यौहार में ए किन्नर अपने भगवान् से एक दिन शादी करती हैं और उसके बाद अगले दिन विधवा हो जाती हैं। विधवा हो जाने के बाद सफ़ेद कपडे पहन कर अगले दस दिन तक सेवा भाव हैं। अब आपके मन में आ की किन्नरों के भगवन अरवन कहां से आये हैं और उनका पौराणिक कथाओं में कहाँ जिक्र है। एक महाभारत युद्ध से पहले भविष्यवाणी हुए की पांडव हार जायेगें , यह बात पांडवों को चिंतित करने लगी। चिंता के कारन अपनी समस्या लेके ज्योतिष के पास पहुंचें तो उन्होंने उपाए बतया की माँ को बलि देनी होगी की , पर सामने कोई भी राजकुमार नहीं आया तब जाके अरवन सामने आएं की वह देगें।

आपको बता दें की खुद की बलि देने के लिए उन्होंने एक शर्त राखी की वह कुंवारे नहीं मारेगें। इस बात को लेके सभी हैरान हो गयें की कौन लड़की एक दिन के लिए विवाह करेगी और विधवा होना चाहेगी। इस समस्या को देखते हुए भगवान् श्री कृष्णा ने इस्री रूप लेके अरवन से विवाह किये और अगले दिन विधवा बने। इसीलिए किन्नर एक दिन के लिए हैं।

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