आइस बाथ क्या होता है? खिलाड़ी बर्फीले पानी से क्यों नहाते हैं?

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विशाखापट्नम टेस्‍ट में भारतीय गेंदबाजों ने खूब पसीना बहाया. पांचवें दिन तो आसमान से जैसे आग बरस रही थी. इस दौरान, टीम इंडिया के कोचिंग स्‍टाफ ने मोहम्‍मद शमी के लिए ड्रेसिंग रूम में खास इंतजाम कर रखे थे. आइस बाथ के लिए बर्फीले पानी से भरी बाल्‍टी, उसी पानी में भिगोकर निकाली गई टी-शर्ट चेंज रूम में मौजूद थी.

टेम्‍बा बवूमा को आउट करने के बाद जब शमी का पहला स्‍पेल खत्‍म हुआ तो वह ड्रेसिंग रूम की तरफ भागे. इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शास्‍त्री ने उन्‍हें देखते ही कहा, “एक काफी नहीं, पांच चाहिए!” इसपर शमी ने अपने ही अंदाज में कहा, “हां, ले लेंगे.” दोनों के बीच आइस बाथ की बात हो रही थी.

जैसे ही शमी आए, उन्‍हें आइस बाथ लेने को कहा गया. उनके कपड़े पहले से तैयार थे. जरूरत हुई तो मोजे बदले गए और फिर शमी फील्‍ड पर लौट गए. शमी अक्‍सर तभी ड्रेसिंग रूम में इस तरह घुसते हैं जब उन्‍हें लगता है कि पिच में उनके लिए कुछ है.

दुनियाभर के ड्रेसिंग रूम्‍स में आइस बाथ की व्‍यवस्‍था होती है. शरीर में बहुत ज्‍यादा लैक्टिक एसिड बनने पर मसल्‍स सुस्‍त हो जाती हैं. बर्फीले पानी से नहाने पर धमनियां टाइट हो जाती हैं और थकी हुई मसल्‍स से लैक्टिक एसिड निकालने में मदद करती हैं.

आइस बाथ से मसल्‍स की फौरन रिकवरी में मदद मिलती है. आइस बाथ का तापमान कितना रखना है, यह उस दिन के मौसम पर डिपेंड करता है. खिलाड़‍ियों को 10 मिनट रेस्‍ट के लिए मिलते हैं. दुनिया के लगभग हर खेल के ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों को तरो-ताजा करने की इससे बेहतर तकनीक अब तक विकसित नहीं हो पाई। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि यह आइस बाथ होता क्या हैं और क्यों खिलाड़ियों के लिए कितना अहम है।

पेशेवर एथलीटों के ट्रेनिंग रूम में बर्फ से भरा बाथटब होना बेहद आम बात है। बहुत से खिलाड़ी कड़ी मेहनत के बाद बर्फ के टुकड़ों वाले पानी में कुछ देर बैठते हैं। इसे आइस बाथ भी कहा जाता है। इसके पीछे धारणा है कि व्यायाम के बाद बर्फीले पानी में नहाने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और शरीर जल्दी ही दोबारा व्यायाम के लिए तैयार हो जाता है। मांसपेशियों को होने वाला नुकसान कम होता है और मांसपेशियों के विकास में भी मदद मिलती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस बात का दावा कोई नहीं कर सकता है कि बर्फीले पानी में बैठना आरामदायक अनुभव है। सच यही है कि ठंडे पानी की बूंदें सुई की तरह चुभती हैं। इसके बाद भी लोग आइस बाथ लेते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे कड़े व्यायाम से थकी मांसपेशियों को आराम मिलता है, मांसपेशियों को होने वाला नुकसान कम होता है और मांसपेशियों के विकास में भी मदद मिलती है।

कुछ युवाओं और एथलीटों पर किए गए अध्ययन में इससे इतर बात सामने आई है। इसमें पाया गया है कि वेट लिफ्टिंग के बाद अगर आइस बाथ लिया जाए, तो इससे व्यायाम का असर कम हो जाता है। इससे मांसपेशियों की मरम्मत की दिशा में तो कोई लाभ नहीं होता है, लेकिन उनका विकास जरूर रुक जाता है।

अध्ययन में पाया गया है कि व्यायाम के बाद आप आराम करने का कौन सा रास्ता अपनाते हैं, इससे यह तय होता है कि उस व्यायाम से आपको लाभ कितना होगा। आइस बाथ पर कई अध्ययन हुए हैं और उनसे उस तरह का लाभ सामने नहीं आया है, जैसा दावा किया जाता है। कुछ अध्ययनों के नतीजे बताते हैं कि मांसपेशियों के स्तर पर आइस बाथ लेने और नहीं लेने वालों में कोई फर्क नहीं होता है।

ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने किया शोध

बर्फीला पानी पड़ने से शरीर की मांसपेशियों पर होने वाले असर का पता लगाने के लिए ऑस्ट्रेलिया स्थित डेकीन यूनिवर्सिटी और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने शोध किया। इसके लिए वेट लिफ्टिंग ना करने वाले 16 स्वस्थ्य युवकों का चयन किया गया। सात हफ्तों तक चले अध्ययन के दौरान उन सभी को हर हफ्ते तीन बार वर्कआउट करना था। वर्कआउट के बाद आधे लोगों ने आइस बाथ लिया जबकि अन्य ने कुछ देर बैठकर अपनी थकान दूर की। अध्ययन के अंत तक दोनों ही समूह के प्रतिभागी स्वस्थ और मजबूत लगे। हालांकि, उनक मांसपेशियों में अंतर पाया गया।

मांसपेशियों में मौजूद बॉयोकेमिकल्स हो जाते हैं असंतुलित

शोधकर्ताओं का कहना है कि मांसपेशिया लंबे फाइबर से निर्मित होती हैं। कसरत के बाद इनका विकास तेजी से होता है। हालांकि, कसरत के बाद तुरंत शरीर पर बर्फीला पानी पड़ने से फाइबर का विकास रुक जाता है। आइस बाथ से मांसपेशियों में मौजूद बॉयोकेमिकल्स का संतुलन बिगड़ जाता है। ऊतक के विकास के लिए जरूरी प्रोटीन की मात्रा घट जाती है जबकि उनके टूटने के लिए जिम्मेदार प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है। यही वजह है कि मांसपेशी के फाइबर छोटे रह जाते हैं।

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