अभिनेता रजनीकान्त ने क्यों नहीं लौटाए भीख में मिले हुये रुपए?

रजनीकान्त बेहद धार्मिक और अध्यात्मिक व्यक्ति हैं. उनका प्रकृति प्रेम भी जग जाहीर है। उनका मानना है कि अध्यात्मवाद पैसा, नाम और प्रसिद्धि सबसे बढ़कर है क्योंकि अध्यात्मवाद से शक्ति मिलती है और शक्ति से उन्हे खाश लगाव है.” इसलिए सुटिंग से वक्त निकाल कर रजनीकांत नियमित तौर पर हिमालय के सफर पर जाते रहते हैं. उनके लिए हिमालय दिव्य रहस्यों का भंडार है और उन्हे ताजगी से भर देता है .

घटना 2007 में आई फिल्म “शिवाजी” द बॉस के समय की है। अपनी इस फिल्म की अपार सफलता से रजनीकांत काफी खुश हुए और मंदिर जाकर पूजा करने की इक्छा जाहीर की । उनकी टीम ने उन्हें सुरक्षा संबंधी परेशानी से बचने के लिए वेश बदल कर मंदिर जाने की सलाह दी । निर्णय लिया गया की रजनी साहब को साधारण कपड़ों में बूढ़े आदमी के वेश में मंदिर भेजा जायेगा, जिससे कि उन्हें कोई पहचान नहीं सके। मेकअप आर्टिस्ट ने बड़ी खूबसूरती के साथ उन्हें एक बूढे कमजोर आदमी का रुप दिया था।

इसके बाद रजनीकांत अपने कुछ साथियों के साथ मंदिर पहुंचे। जब रजनीकांत मंदिर पहुंचे तो उनके बदन पर साधारण कप़डे थे और वह किसी वृद्ध व्यक्ति की तरह ही धीरे-धीरे मंदिर की सीढियां चढ रहे थे। मंदिर से निकलते वक्त, मंदिर परिसर में ही आराम करने उदेश्य से बैठे हुये उन्हे थोड़ी ही देर हुई थी की इतने में एक महिला वहां से गुज़री और उन्हें भिखारी समझ बैठी । चूंकि रजनीकान्त बेहद साधारण और भिखारी वाले वेश में थे तो स्वाभाविक है कोई भी धोखा खा सकता था।

महिला ने उन्हे 10 पैसे थमा दिये । रजनीकान्त पहले तो थोड़े सकपकाये पर महिला की मनोदशा भाँपते हुये सहर्ष ही रुपए ले लिया । जब रजनीकान्त मंदिर से बाहर जाने के लिए अपनी कार में बैठ रहे थे, तब उस औरत ने उन्हें दोबारा देख लिया। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। वह भागते हुये उनके पास गयी और ध्यान से देखने के बाद उन्हे पहचान गयी। माफी मांगते हुये उसने दिये हुये रुपए वापस करने का अनुरोध किया । रजनीकान्त ने हांथ जोड़ लिया और बोले की वो भी एक साधारण आदमी हैं कोई सुपरस्टार नहीं. आपके दिये हुए दस रुपए मेरे लिए आशीर्वाद है।

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