अपने मन की बातों को दूसरों से न कहें

प्रिय साथियों आज का विषय आप सभी लोगों के लिए समर्पित है जो यह संदेश प्रदान करता है की अपने मन की बातों को दूसरों के साथ नहीं बाँटना चाहिए क्योंकि अक्सर लोग दूसरों की कमज़ोरियों का फ़ायदा उठाने की कोशिश करते हैं।कहते हैं की अपने मन की बातों को व्यक्त कर देने से मन हल्का हो जाता है परंतु अगर कुछ बातों को ध्यान में रख कर हम बोले तो बहुत सी परेशानियों से बच सकते हैं जैसे,

हमें अपनी उन भावनाओं और कमज़ोरियों को किसी के सामने कभी नहीं व्यक्त करना चाहिए और हमेशा यही कोशिश करना चाहिए की उन भावनाओं और कमज़ोरियों पर विजय प्राप्त कर के अपने आप को एक सशक्त व्यक्ति के रूप में पहचान दिला सकें।हर व्यक्ति में कुछ अच्छाई और कुछ बुराई होती है जो व्यक्ति अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें गुप्त रूप से दूर करने का प्रयास करता है वह व्यक्ति एक न एक दिन उन कमियों से बाहर आ जाता है लेकिन अगर कोई व्यक्ति उन कमियों को दूसरों को बता देता है तो धीरे-धीरे लोग या तो उसका मज़ाक बनाते है या फिर फायदा उठाते हैं।

कमियाँ हर एक इंसान में होती है,कोई संपूर्ण नहीं होता इसलिए अगर आपके अंदर कोई कमी है तो आप दुखी ना हो,अपनी अच्छाइयों पर गर्व करें,अपना ध्यान उपलब्धियों पर केंद्रित करे।और हमेशा खुश रहे क्योंकि एक खुशहाल व्यक्ति को सभी लोग सफल मानते हैं।अपनी पहचान हमे खुद करनी होती है ना की किसी दूसरे को,अपने मन की बात को अपने से कहकर रास्ता निकालने की कोशिश करनी चाहिए।यदि भगवान ने कुछ कमियाँ प्रदान की है तो उनमें हमारी कोई गलती नहीं है परंतु यदि हमारे कमी के कारण कोई समस्या है तो उससे हमे व्यक्तिगत रूप से छुटकारा पाने का प्रयास करना चाहिए और कभी भी तनाव या चिंता नही करनी चाहिए।आशा करती हूँ की आज का विषय आपको पसंद आया होगा।

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