अगर मैं किसी नए फोन को 100 साल के लिए सीलबंद कर के रख दूँ, तो क्या वह खोले जाने पर चालू हो पाएगा?

नहीं। बिल्कुल नहीं।

लिथियम आयन समेत सभी प्रकार की बैटरियां एक समय के बाद स्वतः डिस्चार्ज हो जाती हैं। आमतौर पर स्मार्टफोन में लगी हुई लिथियम आयन बैटरियां हर महीने 1 से 2% की दर से सेल्फ़-डिस्चार्ज होती जाती हैं। अगर सब-कुछ ठीक रहा तो यह ज्यादा से ज्यादा 100 महीनों बाद पूरी तरह से डेड हो चुकी होगी।

इसके अलावा, जब लिथियम आयन बैटरी आपके फ़ोन में 0% दिखाती है, तब भी इसमें एक छोटा रिज़र्व चार्ज बचा रहता है, क्योंकि सही मायने में 0 हो जाने पर तो बैटरी पूरी तरह खराब हो जाती है। आजकल के फोनों में इस्तेमाल होने वाली कोई भी बैटरी 100 साल से पहले ही बेकार हो जाएगी, और इसकी रिकवरी की कोई उम्मीद नहीं रहेगी।

इसके अलावा, आधुनिक फोन ऑपरेटिंग सिस्टम ‘नाण्ड’ फ्लैश मेमोरी (NAND flash memory) में संग्रहीत किए जाते हैं। यह फ्लैश मेमोरी समय के साथ धीरे-धीरे जानकारी खो देती है, ऐसा भौतिकी के एक समस्यात्मक सिद्धांत के कारण होता है, जिसे “क्वांटम टनलिंग” कहते हैं। अगर ‘नाण्ड’ फ्लैश मेमोरी को पावर सप्लाई न दी जाय तो यह ज्यादा से ज्यादा 5-10 सालों में जानकारी खोना शुरू कर देती है। ऐसी स्थिति में 100 सालों में फोन की मेमोरी पूरी तरह से मिट जाएगी और फोन बैटरी बदले जाने के बावजूद भी बूट नहीं हो सकेगा।

और अंत में, आजकल के प्रोसेसर कॉस्मिक और गामा जैसी किरणों के स्वाभाविक विकिरण के कारण धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं। अगर फोन को किसी मजबूत सील्ड के भीतर नहीं रखा गया तो एक सदी के बाद, लगातार होने वाले विकीरणीय नुकसान के नतीजतन प्रोसेसर या दूसरी चिपें भी बेकार हो सकती हैं।

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